20+ Jai Gurudev Prarthana | जय गुरुदेव प्रार्थना

Jai Gurudev Prarthana: जय गुरुदेव प्रार्थना के बारे में लिखने से पहले एक बार दिल से बोलो “जय गुरुदेव“| इस नाम का मैं अगर व्याख्यान करने बैठ जाऊ तो शयद इस पूरे जीवन में मैं जय गुरुदेव नाम का अर्थ न बता पाऊ इसीलिए मेरे गुरुदेव कहते हैं कि “जय गुरुदेव नाम प्रभू का” अर्थात वो खुद कहते हैं कि जय गुरुदेव नाम उनका नहीं है बल्कि ये नाम प्रभू का नाम है|

हर शिष्य का धर्म है की वो अपने गुरु का सम्मान करे और मेरे ख्याल से गुरु भी स्वयं में एक भगवान के समान ही है इसलिए अपने गुरु का सदैव ध्यान लगाकर उनकी प्रार्थना करना चाहिए| जय गुरुदेव की प्रार्थना में प्रभू की प्रार्थना है इसलिए उनका ध्यान करो|

बाबा जय गुरुदेव की प्रार्थना का भंडार है आज मैं उनके अनंन भक्तों के लिए 20 Jai gurudev prarthana लेकर आया हूँ, जिनसे आपको गुरु जी का ध्यान करने में आसानी होगी|अब आपको प्रार्थना पुस्तिका ले जाने की ज़रुरत नहीं बस इन्टरनेट के मध्यम से google पर जाकर “jai gurudev prarthana digitonly” लिखकर सर्च करें आपको ये भंडार तुरंत दिख जायेगा|

Jai gurudev prarthana जै गुरुदेव प्रार्थना

Table of Contents

जय गुरुदेव प्रार्थना  Jai Gurudev Prarthana

गुरुदेव की बहुत सी प्रार्थनाएं हैं जो कि उन्होंने अपने प्रभू के लिए स्वयं लिखी हुई हैं आज गुरुदेव के भक्त उनके लिए यही प्राथनाएं गाते हैं जिससे गुरुदेव अपने शिष्य को प्रभू से मिलाने में उनकी मदद करते हैं| चलिए जानते हैं जय गुरुदेव प्रार्थना|

गुरुदेव तुम्हारे चरणों में (Gurudev Tumhare Charno Mein)

गुरूदेव तुम्हारे चरणों में, सतकोटि प्रणाम हमारा है।
मेरी नैया पार लगा देना, कितनों को पार उतारा है।
मैं बालक अबुध तुम्हारा हूॅं, तुम समरथ पिता हमारे हो।
मुझे अपनी गोद बिठा लेना, दाता लो भुजा पसारा है।
यद्यपि संसारी ज्वालायें, हम पर प्रहार कर जाती हैं।
पर शीतल करती रहती है, तेरी शीतल अमृत धारा है।।
जब आंधी हमें हिला देती, ठंडी जब हमें कंपा देती।
मुस्कान तुम्हारे अधरों की, दे जाती हमें सहारा है।।
कुछ भुजा उठाकर कहते हो, कुछ महामंत्र सा पढ़ते हो।
गद्-गद् हो जाता हूं भगवन, मिल जाता बड़ा सहारा है।
इस मूर्ति माधुरी की झांकी, यदि सदा मिला करती स्वामी।
सौभाग्य समझते हम अपना, कौतूहल एक तुम्हारा है।।
मैं बारम्बार प्रणाम करूॅं, चरणों में शीश झुकाता हूॅं।
अब पार अवश्य हो जाउंगा, तुमने पतवार संभाला है।।

ये भी पढ़ें: ऐसी पहेलियाँ जो दिमाग घूमा दें

Mujhe Gurudev Charno mein Laga Loge To kya Hoga मुझे गुरुदेव चरणों मे लगा लोगे तो क्या होगा

मुझे गुरु देव चरणों में लगा लोगे तो क्या होगा?
भटकती सुर्त को पावन बना दोगे तो क्या होगा?
न समरथ तुम सदृश कोई है आया दृष्टि में मेरे।
शरण में इससे आया हूॅ बचा लोगे तो क्या होगा।
तुम्हारे द्वार से कोई कभी खाली नहीं जाता।
मेरी झोली भी भर करके उठा दोगे तो क्या होगा।
दयालु दीन बन्धु नाम तेरे लोग कहते हैं।
दया कर तुच्छ सेवक यदि बना लोगे तो क्या होगा।
जानता हूं कि उसके योग्य भी मैं हूं नहीं स्वामी।
हो पारस लौह को कंचन बना दोगे तो क्या होगा।
बहुत बीती रही थोड़ी वो यह भी जाने वाली है।
उस अन्तिम स्वांस लौं अपना बना दोगे तो क्या होगा।

जब तेरी डोली निकाली जायेगी(Jab Teri Doli Nikali Jayegi)

जब तेरी डोली निकाली जायेगी। बिन मुहूरत के उठाली जाएगी।
उन हकीमों ने कहा यों बोलकर। कहते थे दावे किताबे खोलकर।
यह दवा हरगिज न खाली जायेगी। बिना मुहूरत के उठाली जाएगी।
जर सिकन्दर का यहीं सब रह गया। मरते दम लुकमान भी ये कह गया।
यह घड़ी हरगिज न टाली जायेगी। बिना मुहूरत के उठाली जाएगी।
ऐ मुसाफिर क्यों बसरता है यहां। यह किराए पर मिला तुमको मकां।
कोठरी खाली करा ली जाएगी, बिन मुहूरत के उठाली जाएगी।
होगा जम लोक में जब जब  तेरा हिसाब। कैसे मुकरोगे बताओ ऐ जनाब।
जब बही तेरी निकाली जाएगी। बिन मुहूरत के उठाली जायेगी।
जब तेरी डोली निकाली जायेगी। बिन मुहूरत के उठाली जाएगी।

 

इतनी शक्ति मुझे दो मेरे सतगुरु (itni Shakti Mujhe Do Mere Satguru)

इतनी शक्ति मुझे दो मेरे सतगुरु, तेरी भक्ति में खुद को मिटाता चलूं।
चाहे राहों में कितनी मुसीबत पड़े, फिर भी तेरा दिया गीत गाता चलूं।
दूसरों के मदद की जरूरत नहीं, मुझको केवल तुम्हारी मदद चाहिए।
डगमगाये न मेरे कदम राह में, नाम तेरे का डंका बजाता चलूं।
नाव बोझिल मेरे पूर्व के पाप से, सो न जाऊं यही डर सताता मुझे।
चाह मुझको नहीं धर्म वा  अर्थ की, काम व मोक्ष की भी जरूरत नहीं।
धूल चरणों की मिलती रहे उम्र भर, तेरी महिमा निरन्तर सुनाता रहूं।
इतना वरदान दे दो मेरे देवता, खुद जगूं और जगत को जगाता चलूं।
मेरे जैसे अनेकों मिलेंगे तुम्हें, पर हमारे लिए तो तुम्हीं एक हो।
वैसे उलफत की मस्ती रहे हर घड़ी, तेरे कदमों में सिर को झुकाता चलूं।
मुझको गैरों के रिस्तों से क्या वास्ता, सिर्फ रिस्ता तुम्हारा निभाता चलूं। इतनी।

मन तू भजो गुरु का नाम ( Man tu bhajo Guru Ka naam)

मन तू भजो गुरु का नाम। टेक।
दया मेहर से नर तन पाया, मत करना अभिमान।
इक दिन खाली पड़ा रहेगा, जाई बसे षमषान।। मन तू…
जो धन तुझको दिया गुरु ने, इससे कर कुछ काम।
अन्त समय यूं ही लुट जाएगा, संग न जाई छदाम।। मन तू..
यह संसार रैन का सुपना, आय किया विश्राम।
चार दिना के संगी सब हैं, अन्त न आवें काम।। मन तू…
तते चेत करो सतसंगत, भजन करो आठो याम।
यही भजन तेरे संग चलेगा, पावेगा आराम।। मन तू…
दया मेहर सतगुरु से लेकर, चलो त्रिकुटी धाम।
काल करम से बंधन छूटे, मिले पुरुश सतनाम।। मन तू..

धाम अपने चलो भाई( Dham Apne Chalo Bhai)

धाम अपने चलो भाई। पराये देश क्यों रहना।।
काम अपना करो जाई। पराये काम नहिं फसना।।
नाम गुरु का सम्हाले चल। यही है दाम गठ बंधना।।
जगत का रंग सब मैला। धुला ले मान यह कहना।।
भोग संसार कोई दिन के। सहज में त्यागते चलना।।
सरन सतगुरु गहो दृढ़ कर। करो यह काज पिल रहना।।
सुरत मन थाम अब घट में। पकड़ धुन ध्यान घर गगना।।
फंसे तुम जाल में भारी। बिना इस जुक्ति नहीं खुलना।।
गुरु अब दया कर कहते। मान यह बात चित धरना।।
भटक में क्यों उमर खोते। कहीं नहिं ठीक तुम लगना।।
बसो तुम आय नैनन में। सिमट कर एक यहां होना।।
दुई यहां दूर हो जावे। दृष्टि ज्योति में धरना।
श्याम तजि सेत को गहना। सुरत को तान धुन सुनना।।
बंक के द्वार धंस बैठो। तिरकुटी जाय कर लेना।।
सुन्न चढ़ जा धसो भाई। सुरत से मानसर न्हाना।।
महासुन चैक अंधियारा। वहां से जा गुफा बसना।।
लोक चैथे चलो सज के। गहो वहां जाय धुन बीना।।
अलख और अगम के पारा। अजब एक महल दिखलाना।।
वहीं जाय स्वामी से मिलना। हुआ मन आज अति मगना।।

कहें जयगुरुदेव पुकार ज़माना बदलेगा ( Kahen Jai Gurudev Pukar Jamana Badlega)

कहें जयगुरुदेव पुकार, जमाना बदलेगा।
सुनते जाना सभी नर-नारि, जमाना बदलेगा।।
छोटे-बडे़ जितने पद-अधिकारी, सब कोई होंगे शाकाहारी।
बन्द हो जाएगा मांसाहार, जमाना बदलेगा।।
मांस, मछली, अण्डा जो सेवन करेंगे, ताड़ी, शराब, भांग-गांजा पियेंगे।
उनका पद छीन लेगी सरकार, जमाना बदलेगा।।
एम.पी., एम.एल.ए. और मंत्री, मिनिस्टर, सभी लोग होंगे शाकाहारी कट्टर।
बन्द होगा सभी दुराचार, जमाना बदलेगा।।
विदेशी बैंक में जो धन हैं छिपाए, वापस छिहत्तर सन् तक लायें।
नहीं पछतायेंगे सिर मार, जमाना बदलेगा।।
बन्द हो जाये हड़ताल, तोड़फोड़, आन्दोलन, बन्द हो जाये परिवार नियोजन।
बदल जाएगा सभी कारोबार, जमाना बदलेगा।।
नग्न सिनेमें बन्द किए जाएंगे, पुलिस सिपाही वेतन तीन सौ पायेंगे।
सभी बन्द हो चोरी, व्यभिचार, जमाना बदलेगा।।
दिल्ली से राजधानी हटेगी, यू.एन.ओ. भारत में चलेगी।
निर्णय लेने आएगा संसार, जमाना बदलेगा।।
राष्ट्रभाषा होगी संस्कृत और हिन्दी, रिश्वतखोरी पे लग जाएगी पाबंदी।
फैल जाएगा सबमें सदाचार, जमाना बदलेगा।।
कृषकों के कर्ज माफ हो जाएंगे, प्राइमरी अध्यापक वेतन तीन सौ पायेंगे।
होगा बच्चों में भारी सुधार, जमाना बदलेगा।।
बन्द हो जाएगा गऊओं का कटना, कोई नहीं होगी अनैतिक घटना।
मांस-मदिरा का बन्द हो बाजार, जमाना बदलेगा।।
काॅलेज से निकल छात्र नौकरी को पायेंगे, वृद्ध व अपाहिज पैसा राजकोष से पायेंगे।
सुखी होगा सभी परिवार, जमाना बदलेगा।।
आठ रूपया रोज मजदूरी मिलेगी, राष्ट्रपति चुनाव सीधे जनता करेगी।
जो कि हैं देश के कर्णधार, जमाना बदलेगा।।
सत्य और अहिंसा की होड़ लग जाएगी, चोरी, ठगी, झूठ की निशानी मिट जाएगी।
सब हों पूर्ण निरामिषहार, जमाना बदलेगा।।
साधन, भजन की सब करेंगे कमाई, मांसाहारियों की हो जाएगी सफाई।
वर्षा, सूखा पडे़गा अकाल, जमाना बदलेगा।।
परजा बहुत मरेगी जग में, लाशें पड़ी सडेंगी घर-घर में।
उठाने वाले मिलेंगे न यार, जमाना बदलेगा।।
पूरब-पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, छिड़े लड़ाई आए दुर्दिन।
भारी संख्या में होगा नरसंहार, जमाना बदलेगा।।
अन्न का दाना नहीं मिलेगा, टैक्स अभी  और ज्यादा बढे़गा।
धर्म जल्दी से लो अब धार, जमाना बदलेगा।।
सुनते जाना सभी नर-नारि जमाना बदलेगा।
कहैं जयगुरुदेव पुकार, जमाना बदलेगा।

जै गुरुदेव जै गुरुदेव ( Jai Gurudev Jai Gurudev)

जय गुरु देव जय गुरु देव,  जय गुरु देव जय जय गुरु देव । टेक।
मेरे माता पिता गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
सब देवन के देव गुरु देव, जय गुरु देव जय जय गुरु देव।
तिनके चरण कमल मन सेव, जय गुरु देव जय जय गुरु देव।
जीव काज जग आये गुरु देव, जय गुरु देव जय जय गुरु देव।
अपना भेद बताये गुरु देव, जय गुरु देव जय जय गुरु देव।
सत्य स्वरूपी रूप गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
अलख अरूपी रूप गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
अगम स्वरूपी रूप गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
पुरुष अनामी रूप गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
सबके स्वामी आप गुरु देव, जय गुरुदेव जय जय गुरु देव।
उनकी शरण मेरे मन लेव, जय गुरु देव जय जय गुरु देव।
कोटि-कोटि करूं वन्दना, अरब खरब परणाम।
चरण कमल विसरूं नहीं, जय गुरु देव अनाम।।

Mere Satguru Mujhpar Kripa Kab Karoge ( मेरे सतगुरु मुझपर कृपा कब करोगे)

मेरे सतगुरू मुझ पर, कृपा कब करोगे।

हाले दिल से वाकिफ, दया कब करोगे।।

मेरे ही कर्मों से, पीड़ित हैं प्रभुवर।

समझ ना सकूँगा, दयालु हैं रहवर।।

दर्दे दिल से मुझ को, जुदा कब करोगे।। मेरे….

अक्स है स्वामी का, हममें उजागर।

दया मई किरन का, है खेल नरवर।।

मतलब की हद से अलग कब करोगे।।

मेरे…तेरी दिव्यता से है, अनंत प्रकासित।

तेरी गन्ध से है, चराचर सुभाषित।।

अँधेरे में गुम अर्ज पे, नजर कब करोगे।।

मेरे….कोटि विप्र बधिकों को, बक्सा है दाना।

रखी ‘नाम’ की लाज, जानत जहाना।।

सुमेरों में दबी आह पे, श्रवण कब करोगे।।

मेरे..दुन्दुभि सुनि मेरी ताला दे भाजत नरका।

सकल पापी किनका, है दरिन्दा जगत का।।

पापियों के नृपति पर, मेहर कब करोगे।।

मेरे…खाली दरबार से कभी, गया ना सवाली।

महफिल की रौनक, काविज है आली।।

नाजुक कली की कभी पीर सुन सकोगे।।

मेरे…जयगुरूदेव के मर्तबे का दूजा शानी।

अनन्तों भुवन में, दूजा ना जानी।।

है विश्वास रफा-दफा नाम सार्थक करोगे।। मेरे….

सतगुरु माफ करो तकसीर ( Satguru Maaf Karo Takdeer)

सतगुरु माफ करो तकसीर।। टेक।।
सब विधि समरथ जानि आज मैं आया तुम्हारे तीर।
पर पीड़ा हिंसा जीवन भर, लादा पाप शरीर।
पर धन परतिय लम्पट यह मन, नाचत मृग जिमि नीर।
शेखी बड़ी मान का भूखा, तेहि बिन रहत अधीर ।।
जो दे मान बड़ाई झूठी, वही गुरु वह पीर।
जिनसे अंकुश मन पर आवे, तेहि संग जाय न फीर।
तुम तो मर्दन करो मान का, गुरु मेरे रणधीर।
इससे बार-बार मन भागे, नेक धरे नहिं धीर।
पर यह जानि साथ नहिं छोडूं, कोई न तुम सा वीर।
अब तो जयगुरुदेव शरण में, यह मन पाया धीर।
कांगा से हंसा होई बिचरे पियत क्षीर तजि नीर।

बता दो प्रभू तुमको पाऊँ मैं कैसे ( Bata Do Prabhu Tumko Paun Main Kaise)

बता दो प्रभु तुमको पाउं मैं कैसे? विमुख होके सन्मुख, अब आउं मैं कैसे?
विषय वासनायें निकलती नहीं हैं, ये चंचल चपल मन मनाउं मैं कैसे?
कभी सोचती तुमको रोकर पुकारूं, पर ऐसा हृदय को बनाउं मैं कैसे?
प्रबल है अहंकार साधन न संयम, ये अज्ञान अपना मिटाउं मैं कैसें?
कठिन मोह माया में अतिशय भ्रमित हूं, गुरु बिना दया पार पाउ मैं कैसे?
हृदय दिव्य आलोक से जो विमल हो, विनय किस तरह की सुनाउ मैं कैसे?
दयामय तुम्हीं मुझ पतित को सम्हारो, मैं कितनी पतित हूं दिखाउं मैं कैसे?

गुरु चरणों मे अपने लगा लीजे (Guru Charno Me Apne Laga Keeje)

गुरू चरणों में अपने लगा लीजै। मेरे भाग्य को स्वामी जी जगा दीजै।
मो सम पापी जगत कोउ नाहीं, मेरे पापों की गठरी जला दीजै।
काम क्रोध मद लोभ सतावे, इन दुष्टों को स्वामी जी भगा दीजै।
काल और माया हमें भरभावे, इन दोउ से प्रभु जी बचा लीजै।
तुम्हरे दरश की ये अंखिया हैं प्यासी, दर्शन देके प्यास बुझा दीजै।
बैन सुनन को श्रवण मेरे व्याकुल, अमृत भरी बाणी सुना दीजै।

तुम नाम जपन क्यों छोड़ दिया (Tum Naam Japan Kyon Chhod Diya)

तुम नाम जपन क्यों छोड़ दिया।
क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा, सत्य बचन क्यों छोड़ दिया।
झूठे जग में जी ललचा कर, असल वतन क्यों छोड़ दिया।
कौड़ी को तो खूब सम्हाला, लाल रतन क्यों छोड़ दिया।
जिन सुमरिन से अति सुख पावे तिन सुमरिन क्यों छोड़ दिया।
खालस एक सतगुरु भरोसे, तन मन धन क्यों  न छोड़ दिया।

Yahan 12 se bhi Adhik Jai Gurudev Prarthana likhi हुई हैं। अगर आपको ये लगता है कि इनमें से कोई jai gurudev ki prarthana नहीं लिखी है तो आप मुझे कमेंट करके बताएं, में उसे आपके लिए यहां पर जोड़ दूंगा।

Add Comment

%d bloggers like this: