hernia in hindi hernia ka ilaj karan upchar parhej hindi

हर्निया के लक्षण कारण इलाज उपचार परहेज | Hernia In Hindi

हर्निया के लक्षण कारण इलाज उपचार परहेज Hernia In Hindi: हर्निया जैसा रोग किसी भी आयु के स्त्री-पुरुष को हो सकता है। आयुर्वेद में शरीर में स्थित किसी भी अंग के अपने निर्धारित स्थान से हटकर, किसी अन्य मार्ग या अन्य स्थान में पहुँच जाने की विकृति को आंत्रवृद्धि अर्थात् हर्निया कहा जाता है। इस रोग में रोगी के पेट के निचले हिस्से में तीव्र पीड़ा का अनुभव होता है. और कभी कभी रोगी को इतनी अधिक पीड़ा होती है कि उसे उल्टी अर्थात वमन भी होने लगती है. और कभी कभी तो मरीज बेहोश तक हो जाता है. आज आपके लिए हर्निया का इलाज से लेकर इसके कारण लक्षण और घरेलू उपचार बताये जा रहे हैं. तो चलिए हर्निया का घरेलू देशी इलाज जानते हैं.

hernia in hindi hernia ka ilaj karan upchar parhej hindi

 

 

हर्निया के लक्षण कारण इलाज Hernia In Hindi

आज के इस लेख के माध्यम से आप हर्निया के बारे में हिंदी में सारी जानकरी प्राप्त करेंगे. हर्निया के मरीज़ को दर्द होने में असहनीय पीड़ा होती है जिसका कि इलाज संभव है. हर्निया का इलाज (Hernia ka ilaj in hindi) घरेलु तरह से भी किया जा सकता है, लेकिन हम आपको जो भी उपाय बता रहे हैं use आप केवल प्राथमिक तौर पर ही इस्तेमाल करे. यदि आपको 3 दिनों के बाद भी कोई फायदा नज़र न आये तो आप अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.

हर्निया के कारण Cause of Hernia In Hindi

आंत्रवृद्धि की विकृति किसी स्त्री को भी हो सकती है। हर्निया होने के अनेक कारण हो सकते हैं। भारी बोझ उठाने, व्यायाम करने या ऊँचाई से कूदने से आंत अपने निश्चित स्थान से हटकर हर्निया की विकृति उत्पन्न कर देती है। आंत्रवृद्धि होने पर पेट में दर्द होता है। पेट के नीचे की ओर कुछ रेंगता हुआ अनुभव होता है।

hernia in hindi hernia ka ilaj karan upchar parhej hindi

हर्निया होने पर जब लापरवाही बरती जाती है तो कुछ दिनों में ही यह रोग अधिक उग्र रूप धारण कर लेता है। इस अवस्था में रोगी को बार-बार वमन हो सकता है। पेट और जांघों के बीच के भाग में दर्द होता है। ऐसी स्थिति में रोगी को चिकित्सा मुहैया कराना आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति में एलोपैथी के डाक्टर ऑपरेशन का परामर्श दे देते हैं। परन्तु यह आप पर पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप कौन सी पद्धति से हेर्निया का इलाज कराना चाहते हैं.

हर्निया के लक्षण Symptoms of Hernia In Hindi

स्त्रियों द्वारा भारी वजन उठाने के कारण नाभि के अपने निश्चित स्थान से हटने पर आंत्रवृद्धि की विकृति हो सकती है। उदर से वक्षस्थल को अलग करने वाली पेशियों की निर्बलता भी आंत्रवृद्धि की उत्पत्ति कर सकती है। गर्भावस्था में उदर के विकसित होने तथा आंतों पर दबाव पड़ने से भी हर्निया हो सकती है।

भारी वजन उठाने से हर्निया होने पर जांघों व उदर के किसी भाग में गुठली उभर आती है। इस विकृति से गले में भी विकृति हो सकती है। इससे रोगी को कुछ भी निगलने में परेशानी होने लगती है। वक्षस्थल के समीप उत्पन्न आंत्रवृद्धि में गुठली अर्थात् उभरा हुआ भाग दिखाई नहीं देता।

वक्षस्थल के स्तन ग्रंथि के पीछे की ओर कुछ जलन और दर्द की अनुभूति होती है। इस विकृति की चिकित्सा में विलंब करने से गैंगरीन होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में वमन, कोष्ठबद्धता और उदरशूल होने लगता है।

मोटे स्त्री-पुरुष आंत्रवृद्धि से अधिक पीड़ित होते हैं। बहुत दिनों तक जोरदार खांसी होने से भी आंत्रवृद्धि हो सकती है। कब्ज होने पर शौच के लिए बार-बार जोर लगाने से भी आंत्रवृद्धि हो सकती है।

हर्निया का घरेलू इलाज Treatment of Hernia In Hindi

हर्निया होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए और रोग की प्रथम अवस्था में ही चिकित्सा की ओर ध्यान देना चाहिए। देखा गया है कि जब तक तीव्र शूल नहीं होता, तब तक रोगी उसकी चिकित्सा में लापरवाही बरतते हैं। कुछ व्यक्ति तो कई-कई महीनों तक चिकित्सा को टालते रहते हैं और जब हर्निया बहुत बढ़ जाती है तो अस्पताल की ओर दौड़ते हैं।

हर्निया के इलाज के तौर पर लोग प्रारंभ में पेट पर एक विशेष प्रकार की बेल्ट लगाते हैं। इस बेल्ट को पहनने से आंत्रवृद्धि रुकी रहती है। ध्यान दें कि आंत्रवृद्धि में आंत्र एक बार नीचे उतरने पर जब तक ऊपर नहीं जाती तो चिकित्सा करानी जरूरी हो जाती है। चिकित्सा न कराने पर नीचे उतरी आंत में सड़न पैदा होने लगती है। इससे गैंगरीन होने की आशंका बढ़ जाती है।

hernia in hindi hernia ka ilaj karan upchar parhej hindi

आयुर्वेदिक चिकित्सा में अनेक औषधियों के सेवन और लेप लगाने से आंत्रवृद्धि को रोका जा सकता है। आयुर्वेद में हर्निया का इलाज जो भी दिया गया है उन्हें मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं, इनमे से आपको जो भी अच्छा लगे या सुविधाजंका लगे उसे आप पूरी तरह से पालन में लाये.

  •  रास्नादि का काढ़ा बनाकर और छानकर 15-20 मिलीलीटर की मात्रा में लेकर और उसमें 15-20 मिलीलीटर जल मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से आंत्रवद्धि में बहुत लाभ होता है।
  •  वृद्धिनाशन तेल से सुबह-शाम आंत्रवृद्धि पर हल्के हाथ से मलने पर आंत्रवृद्धि कम होती है।
  • अभ्रक भस्म 250 मि.ग्रा. की मात्रा में हरड़ के काढे के साथ सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
  • कूठ, पीपल, बेर की गुठली, सूखा गोबर और जीरा, सभी चीजें बराबर की मात्रा में लेकर, कांजी के साथ कूट-पीसकर हल्का गर्म करके अण्डकोष पर लेप करने से आंत उतरने की विकृति नष्ट होती है।
  • सुबह-शाम भोजन के बाद आंत्रवृद्धि गटिका की 2-2 गोली ताजे पानी के साथ सेवन करज़ने से आंत्रवृद्धि नष्ट होती है।
  • चन्द्रप्रभा बटी की 2-2 गोली दिन में दो बार पानी के साथ सेवन करने से आंत्रवृद्धि की विकृति शीघ्र नष्ट होती है।
  • बुद्धिनाशन रस 225 मि.ग्रा. और वातारि बटी 1 ग्राम की मात्रा में लेकर, उसमें 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर एरण्ड मूल के काढ़े के साथ दिन में दो बार सेवन करने से आंत्रवद्धि का प्रकोप नष्ट होता है।
  • वृद्धिहरी बटिका की 2-2 गोली दिन में दो-तीन बार पानी के साथ सेवन करने से आंत्रवृद्धि की विकति नष्ट होती है।
  • लौह रसायन 250 मि.ग्रा. की मात्रा में अमतारस और शहद मिलाकर प्रातः-सायं सेवन करने से आंत्रवद्धि में लाभ होता है।
  • वृहत सेंधवादि तेल को आंत्रवृद्धि के भाग पर लगाने तथा धीरे-धीरे मलने पर आंत्रवृद्धि में बहुत लाभ होता है।
  • योगराज गुग्गुल की 2-2 गोली दिन में दो बार सेवन करने से वातविकार से उत्पन्न आंत्रवृद्धि में दर्द और सूजन नष्ट होती है।
  • वृद्धिवधिका बटी 1-1 गोली सुबह-शाम हल्के गर्म जल के साथ लेने से आंत्रवृद्धि में बहुत लाभ होता है।

हर्निया में सावधानी Precautions in Hernia In Hindi

हर्निया की विकृति के चलते रोगी को अधिक सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने से बचना चाहिए।मार्ग में चलते समय ज्यादा उछल-कूद भी नहीं करनी चाहिए। स्कूटर चलाना या बसों आदि से कूदकर उतरना भी घातक होता है। कुछ ऐसे खेल हैं जिनमे ज्यादा कूदना पड़ता है, आपको ऐसे खेलों से भी बचना चाहिए.

हर्निया में परहेज Avoiding in Hernia In Hindi

हर्निया के परहेज की स्थिति में रोगी को पर्याप्त आराम करना चाहिए। सुबह-शाम हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। हरी पत्तों वाली सब्जियाँ-पालक, बथुआ एवं सरसों के साग का सेवन करना चाहिए।

अरवी, मटर, गोभी,उडद की दाल आदि वात बढ़ाने वाले हैं अतः इनका सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक चाय, कॉफ़ी, मांस, मछली और चावल से भी परहेज करना चाहिए।

रोगी को जब रोग हो तब उस समय सहवास आदि से भी बचना चाहिए क्यों कि इस अवस्था मे उसे समस्या बढ़ सकती है। साथ ही रोगी को भारी वस्तुए उठाने से भी बचना चाहिए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *