हलासन योग Halasana Yog in hindi

हलासन योग Halasana Yog In Hindi | Plow Pose

हलासन योग Halasana Yog In Hindi: हलासन शब्द हल से आया है चूँकि हलासन योग करते समय योग करने वाले व्यक्ति की स्थिति एक कृषि उपकरण के समान दिखाई देती है और इस उपकरण को हल कहा जाता है। हलासन योग को अंग्रेजी भाषा मे Plow pose भी कहते है। यह आसन एक ऐसा आसान है जिससे यौवन बढ़ता है। नपुंसकता को दूर करने के लिए भी हलासन को किया जाता है, इसलिए योग गुरु नपुंसकता को दूर करने के लिए हलासन करने की सलाह देते हैं। कुंडलिनी को जागृत करने में इससे काफी सहायता मिलती है और हलासन योग महिलाओं के लिए वरदान कहा जाता है।

हलासन योग Halasana Yog In Hindi | Plow Pose
हलासन योग Halasana Yog In Hindi

हलासन योग करने की विधि 1

हलासन करने के लिए सबसे पहले भूमि पर पीठ के बल लेट जाएं, और फिर उसके बाद अपने पूरे शरीर को एकदम सीधा फैला दें। उसके बाद अपने पैरों की दोनों एड़ियां तथा पैरो के अंगूठे परस्पर मिलाये रखे। उसके बाद हथेलियों को शरीर के एकदम पास दोनों बगल में भूमि पर रखें। गर्दन तथा सिर को सीधा कर ले।

अपने दोनों पैरों को फैलाकर कड़ा करें। अंगूठा को भी इस प्रकार फैला दें, कि वह सिर की विपरीत दिशा में निर्देश करें। अब सांस लेने के साथ ही दोनों पांवों को एक साथ तब तक ऊपर की ओर उठाएं रखें, जब तक कि वे लम्बरूप स्थिति में ना आ जाए। दोनों हथेलियों को भूमि पर यथा-स्थान बनाए रहे।जब आप कुछ उच्च स्थिति पर पहुंच जाएं, तब सांस को छोड़ने के साथ ही पावों को सिर की ओर झुकाना सुरु कर दे,तथा उनके द्वारा सिर के आगे पृथ्वी को उसकी दूरी पर छूने का प्रयत्न करें, जहां तक की पांव के अंगूठे के लिए छूना संभव हो सके। 

इस स्थिति में जहां तक जा सकते हो जाएं। जहां टिक सकते हो वहां टिक कर, स्वयं को स्थिर कर ले। साँस छोड़ने की क्रिया समाप्त हो जाये, तब तक स्वाभाविक रूप से सांस लेते और छोड़ते रहे, जब तक कि आसन संपूर्ण(पूरा) ना कर ले। इस स्थिति में 8 से 10 सेकंड तक रहे। ध्यान रहे कि पूर्वोक्त,(पहले) स्थिति में  पैरों को एकदम कड़ा रखना चाहिए, उन्हें घुटनों पर से मोड़ना नहीं चाहिए तथा उनकी अंगुलियां आगे की ओर तनी हुई अथवा भूमि (जमीन) का स्पर्श(छूना) करती हुई स्थिति में रहनी चाहिए। दोनों हथेलियों को भूमि पर रखते समय हाथ भी तने हुए तथा स्थिर रहने चाहिए।

इसके बाद पीठ को भूमि पर वापस लाना आरंभ(शुरू) करें और एक-एक इंच करके पीठ को भूमि की ओर आने दे। धीरे-धीरे एक-सी गति से पृथ्वी(जमीन) पर आते समय पावों तथा उनकी उंगलियों को एकदम कड़ा बनाए रखना चाहिए। जब पैरी की एड़िया भूमि का स्पर्श कर ले, तब संपूर्ण शरीर को 6 से 8 सेकेंड तक विश्राम (आराम)करने दें। यह एक चक्र पूरा हुआ आरंभ में उक्त क्रिया को 2 बार ही दोहराएंगे, बाद में अधिक से अधिक चार बार तक दोबारा भी कर सकते है।

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हलासन योग करने की विधि 2

हलासन योग करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल पृथ्वी पर लेट जाए ,फिर अपने पूरे शरीर को सीधा कर दें।ध्यान रखें, दोनों पैरो की एड़िया तथा पैरों के अंगूठे परस्पर सटे रहे। दोनों हथेलियों को शरीर के एकदम पास बगल में भूमि पर रखें।उसके बाद गर्दन तथा सिर को सीधा कर ले।

अब, उसके बाद सांस खींचते हुए दोनों अपने दोनों हाथों को समानान्तर (बराबर) रखते हुए ऊपर की ओर उठाते हुए सिर के सामने लाएं तथा हथेलियों के पृष्ठ(आगे) भाग को भूमि पर समानांतर पर रख दें। सांस लेने तथा  हाथ उठाने की क्रिया एक- साथ संपन्न हो तथा हाथों द्वारा जमीन छूने तक सांस लेने की क्रिया जारी रहे। जब हाथ पृथ्वी का स्पर्श कर उठे, तब साँस छोड़नी चाहिए। उसके तुरंत बाद ही सांस लेना तथा दोनों पांवों को ऊपर उठाना प्रारंभ करें तथा सांस छोड़ते ही उन्हें एकदम सीधा आसमान (ऊपर की ओर) की ओर उठा दे।

जब पैर पूरी तरह ऊपर उठ जाए, तब सांस छोड़ना आरंभ करें तथा उसके साथ ही पैरों को सिर के सामने पृथ्वी की ओर तथा हाथों को अंगुलियों से ऊपर की ओर झुकाना आरंभ करें। ऐसा करते समय यदि पैरों की उंगलियां पृथ्वी को छू ना कर सके, तब उन्हें जहां तक नीचे ले जाना संभव हो वही तक ले जाएं। इस अवधि में साँस छोड़ने की क्रिया समाप्त हो जानी चाहिए। तत्पश्चात स्वाभाविक रूप से सांस लेनी और छोड़नी चाहिए।

उक्त दोनों पैर एकदम कड़े बने रहे तथा उनकी अंगुलियां बाहर की ओर फैली हुई पृथ्वी पर तथा उसके अधिकतम समीप बनी रहे। घुटने ना तो ढीले और ना मुड़े हुए ही रहे। बाहों, हाथों और हथेलियों को एक दूसरे के बराबर दूरी पर रखना चाहिए, परंतु टांगो तथा अंगुलियों को एक दूसरे के अधिकतम समीप रहना चाहिए।

10 सेकंड तक उक्त व्यवस्था में रहने के बाद धीरे-धीरे नियंत्रित रूप से वापस लौटे। पहले कंधों को पृथ्वी पर आने दे फिर काँख, फिर पसली, फिर कूल्हे के मध्य भाग कमर के पिछले भाग कूल्हों तथा अंत में जांघो,पाँव और एड़ियों को एक-एक इंच करके पृथ्वी पर लाएं।

लौटते समय हाथों को यथा स्थान ही रहने देना चाहिए। केवल पावों को ही समेटे। जब एड़िया भूमि का स्पर्श कर ले, तब दोनों हाथों को ऊपर उठाएं तथा उन्हें बराबर दूरी पर रखते हुए पृथ्वी पर वापस ले आए। तदुपरांत (उसके बाद)संपूर्ण शरीर को ढीला छोड़ कर 6 से 8 सेकेंड तक आराम करें। इस प्रकार अभ्यास का एक चक्र पूरा हो जाएगा।

शुरुआत में केवल एक चक्र पूरा करें। फिर धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाते हुए चार चक्कर तक ले जाएं और फिर इतना ही पर्याप्त है।

हलासन योग करते वक़्त रखने वाली सावधानियां – (Precautions during Halasana Yog)-

  • अधिकतर योग नित्यक्रिया के बाद ही किये जाते हैं जिसमे हलासन भी एक है।
  • हलासन योग सुबह के वक़्त खाली पेट किया जाता है।  और अगर खाना खाने के बाद कर रहे तो, खाने और योग करने के बीच मे 4-6 घण्टे का अन्तर जरूर रखें।
  • हलासन करते वक़्त लौटते समय पैरो की एड़ियो को बहुत ही धीरे – धीरे से भूमि पर वापस लेकर आना चाहिए।
  • एड़ियों को ज़रा भी झटका नही लगना चाहिए, अन्यथा पेट की नसों के अव्यवस्थित हो जाने का डर हो सकता है।
  • अगर आपको डायरिया या गर्दन में चोट की समस्या है, तो आपको हलासन योग नही करना चाहिए।
  • अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर (बी.पी.) या अस्थमा की समस्या है, तो आपको हलासन योग नही करना है।

हलासन योग करने से लाभ Halasana yog Benefits in hindi

  1. हलासन का अभ्यास  सभी यौन – ग्रंथियों के दोषों को दूर कर, उन्हें मजबूत, कुशल एवं सक्रिय बनाता है।
  2. हलासन योग काम शीतल, काम – शक्ति की कमी वह नपुंसकता संबंधी कमियाँ दूर होते हैं।
  3. Halasana Yog मेरुदंड को लचीला बनाकर शरीर के अनावश्यक वजन को घटाता है।
  4. Halasana Yog कमर की चौड़ाई को कम करके मोटापे को घटाता तथा स्नायु संस्थान एवं पाचन संस्थान को शक्ति प्रदान कर शरीर को सुडौल बनाता है।
  5. हलासन के अभ्यास से रीढ़ के प्रत्येक भाग का व्यायाम (exercise) हो जाता है।
  6. हलासन योग करने के कारण शरीर में रक्त संचार तीव्रता से होता है,और वह शरीर के ऊपरी भागों में विशेष रूप से एकत्र होता है अतः इसे चेहरा कांतिपूर्ण बनता है।
  7. Halasana yog करने से युवावस्था में वृद्धि होती है।
  8. हलासन पेट, छाती तथा फेफड़ों के अनेकों रोगों को भी दूर करता है।
  9. हलासन रक्त संचरण को नियमित बनाता है।
  10. हलासन चर्बी को घटाता, वह क्रोध को हटाता है।
  11. इससे मधुमेह रोग (Diabetes) पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।
  12. हलासन  करने से मनुष्य की प्रज्ञा तथा बुद्धि भी तीव्र होती है।
  13. हलासन मस्तिष्क संबंधी कार्य करने वाली बुद्धिजीवियों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।
  14. हलासन युवावस्था प्राप्त लड़कियों के लिए इसकी नियमित अभ्यास बहुत लाकर सिद्ध होता है।
  15.  हलासन योग से ‘कुण्डलनी’ को जागृत करने में बहुत ही सहायता मिलती है।

हलासन योग में विशेष –

हलासन में कुछ अभ्यासी हाथों को बाँधकर सिर का घेरा बनाते है। कुछ लोग हाथो से पंजों की संधि को थाम लेना ही पूर्णावस्था मानते है। हलासन योग से जुडी किसी भी समाधान के लिए आप अपने प्रश्न को यहाँ पूछ सकते हैं.

Article written by Somya Tiwari

मेरी रूचि हमेशा से किताबें पढने में रही, घर पर खाली वक़्त में लेख लिखना और किताबे पढने से आज इस वेबसाइट पर लेखक बनने का मौका मिला. आप मेरे आर्टिकल पढ़कर प्रोत्साहित करें और अपने विचार व्यक्त करें.

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