Typhoid In Hindi: Causes Symptoms and Treatment

Typhoid symptoms causes treatment in hindi

Causes Symptoms and Treatment of Typhoid In Hindi: टाइफाइड लम्बे समय तक चलने वाला बुखार होता है जिसका समय निश्चित होता है। इसलिये इसे मियादी बुखार (Meaning of Typhoid in hindi) भी कहते है लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान की उन्नति के कारण यह मियाद घट गई है. Typhoid को कहीं-कहीं मोतीझरा या मोतीझारा के नाम से संबोधित किया जाता है। इस ज्वर में रोगी के शरीर में नन्हे-नन्हे दाने उभर आते हैं। यह ज्वर रोगी को लम्बे समय तक पीड़ित रखता है जिससे शारीरिक रूप से रोगी अयधिक निर्बल हो जाता है। टाइफाइड बुखार में विशेष यह रहता है कि यदि ठीक होने के बाद भी सावधानियां न रखी गई तो यह फिर से हो जाता है।

Typhoid symptoms causes treatment in hindi

टाइफाइड रोग साल्मोनेला टाइफा नामक जीवाणु (Salmonella Typhi) से होता है।  टाइफाइड के जीवाणु रोगी के मल, मूत्र. बलगम में होते हैं यदि इनका विसर्जन सही ढग से नहीं किया जाता। रोगी का मल, मूत्र, बलगम खुले में रहते है जो जल भोजन को दूषित कर देते हैं। दूषित जल भोजन के प्रयोग करने वाले को यह रोग हो जाता है। टाइफाइड रोग जल द्वारा फैलता है।

Causes Symptoms and Treatment of Typhoid In Hindi

Typhoid symptoms causes treatment in hindi

टाइफाइड के कारण Causes of Typhoid in hindi

टाइफाइड फीवर का कारण यह है कि इसमें जीवाणु शरीर में पहुंचकर यकृत, प्लीहा व लसीका ग्रंथियों पर संक्रमण करके वहीं पर स्थिर हो जाते हैं। खून में मिलकर यह जीवाणु रोग के लक्षण उत्पन्न करते हैं। टाइफाइड जीवाणु के शरीर में प्रवेश कर जाने के बाद कम-से-कम 7 दिन, अधिक-से-अधिक 21 दिन में रोग के लक्षण दिखाई देते हैं। चलिए जानते हैं causes of typhoid in hindi

  • रोगी के सम्पर्क में आने से उसके मल, मूत्र द्वारा यह स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश कर जाते हैं
  • जीवाणु जल, खाद्य पदार्थ के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचते है।

यह रोग आँतों को प्रभावित करता है। इस रोग के जीवाणु मनुष्य की आँतों पर आक्रमण करते है। इस रोग के तीन प्रकार होते हैं-

  1. पेराटाइफाइड ‘ए’
  2. पेराटाइफाइड बी’
  3. टाइफाइड

टाइफाइड के लक्षण Symptoms of Typhoid in hindi

टाइफाइड बुखार के लक्षण कई तरह के हो सकते हैं लेकिन सामान्यतः जिन लक्षणों पर ध्यान दिया जाता है वो निम् प्रकार के हो सकते हैं चलिए जानते हैं symptoms of typhoid in hindi

Typhoid symptoms causes treatment in hindi

  1. बुखार का आना-इस बीमारी में बुखार 100-101 F से प्रारम्भ होकर 104-105″F तक हो जाता है। यह बुखार सुबह के समय हल्का होता है। दिन बदने के साथ-साथ बुखार बढ़ता है। बुखार 24 घण्टे बना रहता है उतरता नहीं है। बुखार लगातार 3-4 हफ्ते तक बना रहता है। प्रथम सप्ताह में बुखार बदता है। दूसरे सप्ताह में स्थिर रहता है। तीसरे सप्ताह में कम होने लगता है। इस बुखार की अवधि 21, 30 या 40 दिन तक की होती है।
  2. जीभ का मध्य भाग सफेद हो जाता है तथा किनारे लाल हो जाते हैं।
  3. मुँह, जीभ सूखते हैं, प्यास ज्यादा लगती है।
  4. नाक से रक्त बहता है।
  5. बुखार के दूसरे सप्ताह में गले तथा छाती पर छोटे-छोटे गुलाबी दाने निकल आते हैं जो पार-धीरे पेट तक फैल जाते हैं। यह दूसरा सप्ताह कष्टदायक होता है क्योंकि बुखार दानों के साथ-साथ पेट फूल जाता है। पेशाब आना बन्द हो जाता है तथा रुधिर स्राव (Haemorrhage) हो जाता है।
  6. तीसरे सप्ताह में बुखार कम होने लगता है तथा उचित उपचार होने पर अन्य लवण भी कम होने लगते हैं।

टाइफाइड बुखार में सावधानियां Prevention during typhoid in hindi

जैसा कि आप सभी ये जान गए हैं कि टाइफाइड बुखार में लीवर में कमजोरी आ जाने से हमेशा बुखार बना रहता है जिसके कारण टाइफाइड का मरीज़ ढंग से कुछ खा भी नहीं सकता है इसलिए इस दौरान कुछ ध्यान देने वाली बाते हैं जो कि आपको जननी चाहिए. यदि आप बार बार यदि सोचते हैं कि Typhoid kyon hota hai तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है.

डॉक्टर के द्वारा चल रहे इलाज के अलावा भी बहुत सी बातें ऐसी हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए. घर में साफ़ सफई के अलावा आपको नीचे दी गयी सभी तरह के बिन्दुओ पर ध्यान देना चाहिए तो चलिए जानते हैं टाइफाइड बुखार के बाद इसका बचाव कैसे करें अर्थात Prevention during typhoid in hindi.

  • रोगी को अलग कमरे में रखें जहाँ सफाई, हवा, सूर्य के प्रकाश का प्रबंध हो।
  • रोगी को पूर्ण विश्राम दें।
  • पानी उबाल कर ठण्डा कर पिलायें।
  • नमक, मसाले बिल्कुल नहीं दें क्योंकि आँत प्रभावित होती है।
  • शक्कर के स्थान पर ग्लूकोस का प्रयोग करें।
  • मल, मूत्र, थूक नष्ट कर दें।
  • पेट पर बर्फ का टुकड़ा रख सकते हैं (अधिक समय तक नहीं)।
  • तरल भोज्य पदार्थ दें।
  • पानी अधिक मात्रा में दें।

टाइफाइड का देशी इलाज Treatment of typhoid in hindi

जब आपको ऊपर बताये गए लक्षण दिखने लगें तो आपको तुरंत ही अपने डॉक्टर को मिलना चाहिए. यदि किसी कारण से आप डॉक्टर के पास नहीं पहुच प् रहे हैं तो कुछ प्राथमिक उपचार के लिए आप घरेलू नुस्खों का भी प्रयोग कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे घरेलू उपचार को आप टाइफाइड का ट्रीटमेंट न समझे क्यों कि यह बहुत अधिक दिनों तक चलने वाला बुखार होता है. यदि आप आयुर्वेदिक पद्धति से ही टाइफाइड का इलाज (Typhoid ka ilaj) करना चाहते हैं तो आप नीचे दिए गए कुछ घरेलू नुस्खों (Home remedies of typhoid in hindi)का प्रयोग करें.

  1. नारायण रस 125 मि.ग्रा., मधुरांतकवटी 62 मि.ग्रा., प्रवाल पिष्टी 250 मि.ग्रा., इन तीनों को मिलाकर गिलोय के सत्व व शहद के साथ 3-3 घंटे के अन्तराल पर रोगी को सेवन कराने से ज्वर का प्रकोप शांत होता है। इससे ज्वर की तीव्रता के कारण उत्पन्न बेचैनी भी शांत होती है।
  2. लक्ष्मी विलास रस 125 मि.ग्रा., श्रृंग भस्म 250 मि.ग्रा. और सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम लेकर खरल करके शहद के साथ सेवन कराने से आंत्रिक ज्वर के कारण उत्पन्न पीठ दर्द में बहुत लाभ होता है तथा खांसी के प्रकोप से रोगी को राहत मिलती है।
  3. आंत्रिक ज्वर में रोगी को नींद नहीं आती, ऐसे में रोगी को ब्राह्मी बटी 250 मि.ग्रा., प्रबाल पिष्टी 125 मि.ग्रा., चन्द्रकला रस 250 मि.ग्रा. की मात्रा में लेकर खरल करले, इसकी 1 मात्रा रात्रि में ब्राह्मी के कषाय के साथ सेवन कराने से रोगी को गहरी नींद आती है।
  4. लक्ष्मीनारायण रस 125 मि.ग्राम, अमृतासत्व 250 मि.ग्राम, संजीवनी 125 मि. ग्राम और मुक्तापिष्टी 250 मि. ग्राम लेकर खरल करके ऐसी 3 खुराक बनाएं। एक-एक खुराक दिन में तीन बार तुलसी दल के रस एवं शहद के साथ रोगी को सेवन कराएं।
  5. 250 मि.ग्रा. प्रबाल पिष्टी, 250 मि.ग्रा. सिद्धामृत रस, 125 मि.ग्रा. कहरवा पिष्टी, 125 मि.ग्रा. मुक्ता पिष्टी और 250 मि.ग्रा. रत्ती बोलपर्पटी लेकर खरल करें और दूर्वा के रस एवं शहद के साथ रोगी को सेवन कराएं। दो-तीन घंटे बाद इसी प्रकार रोगी को दूसरी खुराक दें।
  6. ज्वर की अधिकता के कारण कई बार रोगी प्रलाप-सा करने लगता है, ऐसे में 62 मि.ग्रा. मुक्ता पिष्टी, 125 मि.ग्रा. प्रबाल पिष्टी और सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम खरल में पीस लें। ऐसी तीन मात्राएं बनाएं। एक-एक खराक शहद के साथ दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और सायं रोगी को सेवन कराएं, लाभ होगा।
  7. संजीवनी 125 मि.ग्रा., प्रबाल बटी 250 मि.ग्रा., ब्राह्मी बटी 60 मि.ग्रा., कस्तूरी भैरव रस 60 मि.ग्रा. लेकर किसी खरल में पीसकर ऐसी 3 मात्रा बनाएं। दिन में तीन बार चार-चार घंटे के उपरांत से रोगी को शहद और तलसी के पत्तों के साथ सेवन कराएं।
  8. यदि ज्वर की अधिकता के कारण रोगी को अत्यधिक प्यास लगे और पानी पीने पर उल्टी आए या आने की संभावना हो तो ऐसी स्थिति में रोगी को पीपल की छाल का बुझा पानी पिलाएं, इससे रोगी की प्यास शांत होगी और वमन की संभावना भी नहीं रहेगी । पीपल की छाल लाकर जलाएं और उसे पानी में बुझा लें तत्पश्चात छान लें.

टाइफाइड में क्रोष्टबद्धता यानि कब्ज से भी रोगी परेशान हो उठता हे । ऐसे में कुछ लोग घरों में रोगी को विरेचन देते हैं, यह गलत है, इस स्थिति में रोगी को मुनक्का खाने के लिए दें । मुनक्का काले नमक या दूध किसी के साथ भी सेवन की जा सकती है ।

टाइफाइड में क्या न खाए Diet Chart of Typhoid in hindi

हम अक्सर ये जानने कि कोशिस करते हैं कि आखिर टाइफाइड में क्या खाना खाए और क्या न खाए. दरअसल टाइफाइड फीवर हो जाने पर मरीज़ की पचाने कि शक्ति कम हो जाती है अर्थात उसका लीवर कमजोर हो जाता है तो ऐसे में मरीज़ को वही खाना खाना चाहिए जो कि जल्दी से पाच जाते हैं. तो नीचे कुछ ध्यान देने कि बाते हैं जो आपको टाइफाइड मरीज़ के डाइट चार्ट (Diet chart of typhoid in hindi)में शामिल करनी चाहिए. 

  • टाइफाइड फीवर में रोगी को वसायुक्त खाद्य पदार्थ नहीं देने चाहिए, इससे अतिसार की स्थिति उत्पन हो जाती है और रोगी का ज्वर असाध्य स्थिति में पहुंच जाता हैँ ।
  • रोगी को अनाज से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं कराना चाहिए ।
  • टाइफाइड रोगी को फलों का सेवन कराएं लेकिन शीत गुण वाले फलो से परहेज करें ।
  • चीकू औंर सेब रोगी के लिए सबसे अधिक लाभप्रद होते हैं ।
  • टाइफाइड फीवर में रोगी को मांस मछली घी तेल से बने खाद्य पदार्थ या अधिक मिर्च मसाले युक्त एबं अम्लीय रसों से बने खाद्यों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ।
  • रोगी को मूंग की दाल, दलिया या दाल चावलों से बनी खिचडी का सेवन कराए।
  • उड़द की दाल एबं उससे बने व्यंजन, दूध से बने खाद्य पदार्थ, कचालू अरबी, चावल आदि का सेवन रोगी को नहीं कराना चाहिए।

टाइफाइड बुखार होने के बाद बचाव

आपको ये कई बार बताया गया है कि टाइफाइड फीवर होने पर रोगी का लीवर कमजोर हो जाता है. ऐसे में रोगी के सही हो जाने के बाद भी बहुत सी बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. रोगी पर नज़र रखना इस लिए और ज़रूरी हो जाता है क्योकि वह समझता है कि अब use बुखार नहीं आ रहा है तो मैं सामान्य चीजों को खा सकता हूँ. ऐसी गलती होने पर रोगी को फिर से टाइफाइड फीवर होने के सम्भावना बढ़ जाती है. तो आपको ये बाते ध्यान रखनी चाहिए (Precautions after typhoid in hindi).

  • टीका लगवायें (यदि मरीज़ छोटा है)
  • सफाई तथा स्वास्थ्य नियमों का पालन करें।
  • पानी उबाल कर पीयें।
  • बीमारी ठीक होने के बाद विशेष ध्यान दें क्योंकि रोगी इतना कमजोर हो जाता है कि थोड़ी लापरवाही से पुनः बुखार आ जाता है। रोगी के ठीक होने के बाद भी कभी-कभी उसके यकृत, आँतों में इसके जीवाणु शेष रह जाते हैं जो पुनः रोगी बना सकते हैं या उसके मल, मूत्र द्वारा निकल कर स्वस्थ व्यक्ति को रोगी बना सकते हैं।
  • ठीक होने के बाद रोगी की कमजोरी दूर करने के लिए अधिक पौष्टिक वाला भोजन देना प्रारम्भ न करें बल्कि भोजन में पौष्टिक तत्वों की मात्रा धीरे-धीरे बढायें।
  • मक्खियों को नष्ट करने का प्रबन्ध करें। भोजन-ज्वर के समय उबला पानी, जौ का पानी, ग्लूकोज, फल का रस, दूध।
  • ज्वर पर नियंत्रण की अवस्था में जौ का पानी, दूध, दलिया, डबल रोटी, फल का रस, खिचड़ी, भुने आलू, मूंग की दाल।
  • ज्वर ठीक होने पर प्रोटीन, वसा तथा रेशेयुक्त भोज्य पदार्थ दें। चपाती, दाल, हरी सब्जियो, दही आदि भोजन में दें।

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